खेल डेस्क. वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी यानी वाडा को डाटा उपलब्ध न कराने की वजह से रूस टोक्यो ओलिंपिक से भी बाहर हो सकता है। वाडा को शक है कि रूस ने ड्रग पॉजिटिव एथलीट्स का लैब डाटा डिलीट कर दिया है। इसके बावजूद, रूस को तीन हफ्ते दिए गए हैं। वाडा के चेयरमैन जोनाथन टेलर ने कहा- हमारे पास कुछ सबूत हैं। जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि रूस ने ड्रग पॉजिटिव एथलीट्स का डाटा डिलीट कर दिया है। अगर तीन हफ्ते में रूस बेगुनाही साबित नहीं कर पाया तो उसे खेल क्षेत्र में बेहद कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
मेजबानी का हक भी छिन सकता है
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्रग पॉजिटिव पाए गए एथलीट्स का डाटा डिलीट करने का दोषी साबित होना रूस को बहुत महंगा साबित होगा। उसे टोक्यो ओलिंपिक के साथ ही वर्ल्ड चैम्पियनशिप से भी बाहर किया जा सकता है। इतना ही नहीं वो खेलों का कोई बड़ा आयोजन भी नहीं कर सकेगा।
ये हालात क्यों बने?
रूस ने इसी साल जनवरी में वाडा को अपनी सरकारी डोपिंग लैब का डाटा सौंपा। यह मॉस्को में है। रूस ने कहा कि इस एकीकृत डाटा को सौंपने के बाद उसे वाडा की प्रतिबंधित लैब सूची से बाहर किया जाना चाहिए। लेकिन, सोमवार को वाडा ने साफ कर दिया कि उसे जो डाटा मिला है, वो विश्वसनीय नहीं है। वाडा ने कहा कि रूस ने संस्था के मानकों का पालन नहीं किया। खास बात ये है कि रूस की डोपिंग एजेंसी के निदेशक यूरी गानुस ने भी माना कि संभवत: वाडा को भेजे गए डाटा से छेड़छाड़ की गई है। यूरी ने कहा कि अगर रूस पर कार्रवाई होती है तो यह दुखदायी होगा।
आगे क्या होगा?
टेलर के अनुसार, इस मामले में दो विकल्प हैं। पहला- वाडा रूस के जवाब का इंतजार करेगा। इसके बाद नए नियमों के हिसाब से उस पर प्रतिबंध लग सकते हैं। दूसरा- रूस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स (सीएएस) के समक्ष अपील दायर करे। सीएएस का फैसला सभी को मान्य होगा। वो चाहे तो रूस को चेतावनी देकर भी छोड़ सकता है। लेकिन, वहां वाडा की दलीलें ज्यादा मजबूत होंगी। इसलिए टेलर ने कहा- अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
2015 में हुई थी शुरुआत
रूस और वाडा के बीच डोपिंग पर तनातनी 2015 में शुरू हुई। वाडा ने मॉस्को लैब के डाटा को तब भी संदिग्ध मानते हुए रूस को 2016 के रियो ओलिंपिक से बाहर करने की सिफारिश की थी। हालांकि, इंटनेशनल ओलिंपिक कमेटी (आईओसी) ने यह सिफारिश नकार दी थी। रूस को खामियाजा 2018 में भुगतना पड़ा। उसे प्योंगचेंग विंटर ओलिंपिक में हिस्सा तो लेने दिया गया लेकिन वो पदकों का हकदार नहीं था।
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