दुनिया के मशहूर फुटबॉल क्लबों में से एक चेल्सी ने साफ कर दिया है कि वो प्लेयर्स की सैलरी कम नहीं करेगा। क्लब की तरफ से यह भी साफ कर दिया गया है कि फुल टाइम स्टाफ को भी अस्थायी तौर पर छुट्टी देने की कोई योजना नहीं है। क्लब की सफाई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में लगाए जा रहे कयासों के बाद आई है। इन रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चेल्सी प्लेयर्स की सैलरी कम करने पर विचार कर रहा है।
क्लब ने क्या कहा?
शनिवार देर रात जारी एक बयान में क्लब ने कहा, “हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि क्लब अपने फुल टाइम स्टाफ की सैलरी में कोई कटौती नहीं कर रहा है। उनको वही पैकेज मिलता रहेगा जो अब तक मिलता रहा है।” हालांकि, क्लब ने प्लेयर्स से महामारी के दौर में सामाजिक योगदान देने की अपील जरूर दोहराई है।
मदद के लिए आगे आएं प्लेयर्स
एक अलग बयान में चेल्सी मैनेजमेंट ने अपनी मुख्य टीम से चैरिटी में योगदान की अपील दोहराई। कहा, “फिलहाल, मुख्य टीम के प्लेयर्स ने आर्थिक तौर पर ज्यादा मदद नहीं की है। अब बोर्ड ने खिलाड़ियों से कहा है कि वो सामाजिक और आर्थिक योगदान जरूर दें। संकट गहराता जा रहा है। हम चाहते हैं कि हमारे सभी खिलाड़ी क्लब के चैरिटी प्रोग्राम्स में हिस्सा लें।”
एक अच्छी पहल
चेल्सी की महिला फुटबॉल टीम को भी पहले की तरह सैलरी और एरियर्स मिलते रहेंगे। इस बीच, टीम मैनेजमेंट ने ये भी साफ कर दिया है कि वो ब्रिटिश सरकार द्वारा चलाई जा रही रोजगार योजनाओं का लाभ नहीं लेगा। क्लब के अस्थायी कर्मचारियों को भी 30 जून तक का पूरा वेतन और भत्ते दिए जाएंगे। न्यूकैसल और नॉर्विक जैसे प्रीमियर क्लबों ने अपने नॉन प्लेइंग स्टाफ को अस्थायी छुट्टी देने का फैसला किया है। टॉटेनहैम और लिवरपूल की इसी मसले पर काफी आलोचना हुई। अब वो फैसले पर फिर विचार कर रहे हैं।
फुटबॉल पर असर
कोरोनावायरस के चलते खेलों पर भी गंभीर असर हुआ है। दुनिया की ज्यादातर फुटबॉल लीग या तो टाल दी गई है या उन्हें रद्द कर दिया गया है। प्रीमियर लीग, ला लीगा और बुंडेसलीगा अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई हैं।
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